Aap mere jaise ho?

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एक प्यारे से couple को करीब 10 साल बाद एक बच्ची हुई, वो सभी आपस में खुश थे,
एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे. और बच्ची तो उनकी दुलारी थी. एक सुबह, जब बच्ची करीब कुछ दो सालो की थी, तो पति ने टेबल पर एक बोतल देखि जिसका ढ़क्कन खुला हुआ था. वो काम के लिए late हो रहा था.
इसलिए उसने पत्नी को बोतल का ढ़क्कन लगाने और उसे अलमारी में रखने के लिए कह कर चला गया. पत्नी जो की kitchen में अपने काम में busy थी. वो भूल ही गयी.
उसका ध्यान नहीं गया. छोटी लड़की ने उस बोतल को देखा और खेल खेल में उसके पास जाकर उसे उठा लिया. उसके रंगीन रंग को देख कर खुश होते हुए उससे खेलने लगी. और उसे पूरा पी गयी… वो बोतल एक दवा की थी,
जो adults के लिए वो भी कम dosages के लिए थी. उस दवा से बच्ची की हालत बहुत ख़राब हो गयी. दवा जहर की तरह असर कर रही थी. क्योंकि उसका छोटा सा शरीर सह नहीं पा रहा था.. जब उसकी माँ ने यह देखा तो वो तुरंत उसे अस्पताल ले गयी, जहाँ उसकी मृत्यु हो गयी.. उसकी माँ बहुत ही डर गयी, और
सदमे में आ गयी. वो अपने पति का सामना कैसे करेगी.. खबर पाते ही, पति जब आये और अपनी बच्ची को इस हालत में देखा तो वो सह नहीं पाए, उन्हें दर्द हुआ. उन्होंने अपनी पत्नी की तरफ नजर उठा के देखा, वो सहमी हुई थी, और कहा, “ मैं तुम्हे बहुत ही ज्यादा चाहता हूँ.” और पत्नी को गले लगाकर उसे सहारा दिया, अपने बच्चे को खोने के गम में वो बिलख पड़ी… पति के ऐसे reaction की उम्मीद नहीं थी, पर उसके मन में बस एक बात आई. अगर
वो खुद ही बोतल बंद कर देता तो, और अपनी पत्नी, जिसने अभी अभी अपनी मासूम सी बच्ची खोयी है, उसे दिलासे की जरुरत है, आरोप-प्रत्यारोप से कुछ नहीं होने वाला था… उसने वो किया जो समय और स्तिथि के अनुरूप था. कई बार हमारे जीवन में भी ऐसे पल आ जाते है, जब हम आसानी से किसी पर अपना काम थोप देते है, जबकि हम स्वयं ही उन्हें करने के काबिल हैं. हम दूसरो पर असफ़लता का ठीकरा भी फोड़ देते हैं.

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चुकंदर एक ऐसी सब्जी है जिसे बहुत से लोग नापसंद करते हैं. इसके रस को पीने से न केवल शरीर में रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. यदि आप इस सब्जी से नफरत करते हैं तो जरा एक बार इसके फायदों के बारे में जरूर पढ़ लें.

शायद कम लोग ही जानते हैं कि चुकंदर में लौह तत्व की मात्रा अधिक नहीं होती है, किंतु इससे प्राप्त होने वाला लौह तत्व उच्च गुणवत्ता का होता है, जो रक्त निर्माण के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि चुकंदर का सेवन शरीर से अनेक हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में बेहद लाभदायी है।

ऐसा समझा जाता है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें लौह तत्व की प्रचुरता के कारण है, बल्कि सच यह है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें पाए जाने वाले एक रंगकण (बीटा सायनिन) के कारण होता है। एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण ये रंगकण स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं।

एनर्जी बढ़ाये : यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का जूस पी लीजिये. इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है. खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है.

पौष्टिकता से भरपूर : यह प्राकृतिक शर्करा का स्रोत होता है. इसमें कैल्शियम, मिनरल, मैग्नीशियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाये जाते हैं. इसलिए घर पर इसकी सब्जी बना कर अपने बच्चों को जरूर से खिलाएं.हृदय के लिए : चुकंदर का रस हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर रखता है. खासकर के चुंकदर के रस का सेवन करने से व्यक्ति में रक्त संचार काफी बढ़ जाता है. रक्त की धमनियों में जमी हुई चर्बी को भी इसमें मौजूद बेटेन नामक तत्व जमने से रोकता है.

स्वास्थ्यवर्धक पेय : जो लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उनके लिये चुकंदर का जूस बहुत फायदेमंद है. इसको पीने से शरीर में एनर्जी बढ़ती है और थकान दूर होती है. साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है.

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सर्दियों के दिनों में बाजार में हर जगह अमरुद ही अमरुद दिखाई देने लगते हैं| देखने में हरे और लाल रंग के अमरूद लोगों को काफी पसंद आते है। खाने में तो ये स्वादिष्ट होते ही है साथ ही सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि अमरूद का सेवन, आपके चेहरे को कांतिमय बनाता है|

दरअसल, अमरुद में विटामिन सी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे त्वचा संबधित रोग नहीं होते हैं। इसमें विटामिन,फाइबर और मिनरल प्रचुर मात्रा में होता है जो कब्ज की समस्याओं से निजात दिलाता है| जिन व्यक्तिओं के नाक-कान से खून आता हो, उन्हें भी अमरूद का सेवन करना चाहिए। सिर्फ यही नहीं अमरुद एसिडिटी, अस्थमा, ब्लडप्रेशर, मोटापा आदि समस्याओं में भी फायदा पहुंचाता है।

यह कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करता है साथ ही साथ यह पित्त रोगों में भी मददगार होता है। वैसे भी अमरूद ऐसा फल है, जो लोगों की जेब का भी हिसाब रखता है| इसलिए अगर आप भी सुंदर और स्वस्थ बनना चाहते है तो आज से ही अमरूद का सेवन शुरू कर दें।

अमरुद खाने के फायदे

* अमरुद फेफड़ो को स्वस्थ रखता है|
*अमरुद खाने से हाई ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाता है|
*ये खून के बहाव को ठीक रखता है जिससे ह्रदय स्वस्थ रहता है।
*ये दमा के रोगियों को फायदा पहुँचाता है|
* अमरुद खाने से पेट की बदहजमी की समस्या ठीक हो जाती है|ये कब्ज को भी ठीक कर देता है।
*अमरुद मोटापे को भी कम करता है|
* अमरुद में अधिक मात्रा में विटामिन c पाया जाता है जो की शरीर के प्रतिरक्षा तन्त्र को मजबूत बनाता है जिससे हमें सर्दी, खांसी, जुकाम जैसे बीमारियाँ नहीं होती|
* ये रक्तस्त्राव के रोग को भी ठीक कर देता है|
* इसमें केल्शियम भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो की हमारे शरीर की हड्डियों और दाँतों को स्वस्थ रखता है|.

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गर्मी में पुदीना खाएंगे तो इन बीमारियों की छुट्टी हो जाएगी ————-
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गर्मी में पुदीना खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये एक बहुत अच्छी औषधि भी है साथ ही इसका सबसे बड़ा गुण यह है कि पुदीने का पौधा कहीं भी किसी भी जमीन, यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पडती है।
थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिए पर्याप्त है। पुदीना को किसी भी समय उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर प्रयोग में लाया जा सकता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं पुदीने के कुछ लाजवाब गुण
1.मुंहासे दूर करता है
2.श्वांस संबंधी परेशानियों में रामबाण
3.कैंसर में भी है उपयोगी
4. मुंह की दुर्गंध मिटाता है
5. खांसी खत्म करता है
6. गर्मी दूर कर ठंडक पहुंचाता है
7.बुखार में राहत देता है

– हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें।

– कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरा निखर जाएगा।
– हरे -पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें।
-इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।

– एक चम्मच पुदीने का रस, दो चम्मच सिरका और एक चम्मच गाजर का रस एकसाथ मिलाकर पीने से श्वास संबंधी विकार दूर होते हैं।
– इतना ही नहीं अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और -आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।

– एक रिसर्च से पता चला है कि यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में लाभकारी है ।
– इसलिए हमें अपने घर के बगीचे में पुदीने का पौधा जरूर लगाना चाहिए,पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है।
– पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे।

– नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।

– सलाद में इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्धक है। प्रतिदिन इसकी पत्ती चबाई जाए तो दुत क्षय, मसूडों से रक्त निकलना, पायरिया आदि रोग कम हो जाते हैं। यह एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है और दांतों तथा मसूडों को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है। एक गिलास पानी में पुदीने की चार पत्तियों को उबालें। ठंडा होने पर फ्रिज में रख दें। इस पानी से कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।

– एक टब में पानी भरकर उसमें कुछ बूंद पुदीने का तेल डालकर यदि उसमें पैर रखे जाएं तो थकान से राहत मिलती है और बिवाइयों के लिए बहुत लाभकारी है।पानी में नींबू का रस, पुदीना और काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है। इसके अलावा हकलाहट दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों में काली मिर्च पीस लें तथा सुबह शाम एक चम्मच सेवन करें।पुदीने की चाय में दो चुटकी नमक मिलाकर पीने से खांसी में लाभ मिलता है। हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

– हरे पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है। इतना ही नहीं अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।

– पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है तथा न्यूमोनिया से होने वाले विकार भी नष्ट हो जाते हैं। पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें। नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।

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दर्द भरे मुंहासो को ठीक करने के घरेलू उपचार

आपका चेहरा तब तक बहुत खूबसूरत लगता है जब तक कि उस पर पिंपल या मुंहासे प्रकट न हो। और यह तभी आते हैं जब आपको किसी खास पार्टी या शादी में हिस्‍सा लेना हो। सच मानिये ऐसा लगता है कि मानों अंदर से सारा आत्‍मविश्‍वास ही खतम हो चुका हो। क्‍या आपके चेहरे पर भी भारी भारी पिंपल हैं और वे दर्द करते हैं। तो निराश होने की जरुरत नहीं है, ऐसा नहीं है कि मुंहसे जिंदगी …भर आपका पीछा नहीं छोड़ेगे। हमारे घरों में कुछ ऐसी चीजे़ हैं जो आपको पिंपल की समस्‍या से छुटकारा दिला सकती हैं।

दर्द भरे मुंहासों से निपटना इतना भी मुश्‍किल नहीं है जितना लगता है। ऐसे कई फल हैं जैसे, अंगूर, संतरा, खीरा आदि जिसका पेस्‍ट लगाते ही आपके मुंहासो को ठंडक पहुंचेगी और वे दर्द करना बंद कर देगें। इसके अलावा किचन में मौजूद कुछ सा‍मग्रियां जैसे मेथी, नीम या शहद आदि भी मुंहासों के दर्द को काफी हद तक दूर कर सकते हैं।

नींबू का रस
दर्द भरे मुंहासों से राहत पाने के लिये आप नींबू के छिलके को चेहरे पर हल्‍के हल्‍के रगड़ सकती हैं। इससे मुंहासे कि गंदगी साफ होगी और कुछ ही दिनों में वह सूख जाएंगे। ऐसा प्रतिदिन करें, लाभ जरुर मिलेगा।

मेथी
आप अपने चेहरे पर मेथी की पत्‍तियों का पेस्‍ट लगा सकती हैं। इसे चेहरे पर 15 मिनट लगा कर छोड़ने के बाद गल्‍के गरम पानी से धो लें। दर्द गायब हो जाएगा।

दादी मां का घरेलू नुस्‍खा, नीम
नीम बहुत ही गुणकारी मानी जाती है, यह त्‍वचा रोग को आसानी से मिटा कसती है। इसे अपने चेहरे पर रोजाना लगाएं और एक्‍ने तथा मुंहासों से छुटकारा पाएं।

एलो वेरा जूस
सौंदर्य से संबन्‍धित कई समस्‍याओं को एलो वेरा से सही किया जा सकता है। जिसमें से मुंहासे आम हैं। दिन में दो बार मुंहासों पर एलोवेरा जूस लगाइये, जिससे वह जल्‍दी ठीक हो जाए।

टी ट्री ऑयल
दिन में तीन बार अपने पिंपल्‍स पर टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदे लगाएं। यह एक एंटीसेप्‍टिक एजेंट और बैक्‍टीरिया को पनपने से रोकता है।

शहद
अपने मुंहासो पर हफ्ते भर रोज शहद लगाइये। इसे 10 मिनट रखने के बाद चेहरे को गरम पानी से धो लीजिये। इससे पोर्स अच्‍छी प्रकार से बंद हो जाएंगे।

ठंडा खीरा
खीरा और दही लीजिये और उसका गाढा पेस्‍ट बनाइये। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाइये। इसे आधा घंटा बैठने दीजिये और फिर सादे पानी से धो लीजिये।

संतरा
इसमें विटामिन सी के साथ साथ एसिडिक तत्‍व भी पाए जाते हैं, जो कि त्‍वचा की तमाम प‍रेशानियों को ठीक कर सकते हैं। संतरे के छिलके को सुखा कर पीस लें और उसे पानी के साथ मिक्‍स करें। इस पेस्‍ट को पिंपल पर लगाएं और राहत पाएं।

अंगूर
संतरे की ही तरह अंगूर में भी विटामिन सी पाया जाता है। ताजा और ठंडा अंगूर ले कर उसे काटिये और चेहर पर लगाइये। 10 मिनट के बाद चेहरे को सादे पानी से धो लीजिये।

टूथपेस्‍ट
सोने से पहले रात में अपने चेहरे पर हल्‍का सा टूथपेस्‍ट लगाइये। ऐसा केवल दो या तीन बार करें और पिंपल फ्री चेहरा पाएं।

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संतरे खाएं तो छिलके न फेंके क्योंकि इन रोगों की ये है जबरदस्त दवा —–
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जब हम संतरे को खाते हैं तो सामान्यत: हम उसके छिलके को फेंक देते हैं या उसके छिलके का उपयोग एक दूसरे की आंखों में डालने व रुलाने के लिए मस्ती में करते हैं जो एक तरह से एक उपयोगी चीज का नुकसान करना ही कहलाएगा। जी हां आपको ये सुनकर आश्चर्य जरूर हो रहा होगा लेकिन यह सच है।
संतरे का छिलका इतना उपयोगी है कि जब आप इसके गुण जान जाएंगे तो कभी इसके छिलके फेंकना नहीं चाहेंगे।

बालों को खूबसूरत बनाता है- अगर आपके बाल एकदम रफ और बेजान दिखाई देते हैं तो संतरे के छिलके आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। संतरे के छिलकों को पीसकर बालों में लगाकर कुछ देर रखें और फिर बाल धो लें। बाल चमकीले और मुलायम हो जाएंगे। संतरे के छिलकों को पीस कर उसमे गुलाब जल मिलाकर चहरे पर लगाने से दाग व धब्बे मिटते हैं।

स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं- संतरे के छिलके में क्लीजिंग, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि पिंपल और एक्ने से लडऩे में सहायक होते हैं। संतरे के छिलके को सुखाकर पीसकर उसे दही मिलाकर स्किन पर लगाने से स्किन ग्लोइंग व स्मूथ बनती है। संतरे के छिलकों को बेसन में मिलाकर लगाना ऑइली स्किन वालों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है और पिंपल्स को खत्म कर देता है।

कोलेस्टॉल के रोगियों के लिए फायदेमंद है – एक अध्ययन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम हो तो ऐसे में संतरे के छिलके उपयोगी साबित हो सकते हैं। संतरे के छिलको में ऐसा गुण पाया जाता है जिससे उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर है जो मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को फायदा हो सकता है। साथ ही ये कैंसर व हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं में भी विशेष रूप से लाभदायक है।

पाचन शक्ति बढ़ाता है- इसके छिलके में पाचनशक्ति बढ़ाने की क्षमता होती है। यह पाचन में सुधार, गैस, उल्टी, हार्ट बर्न और अम्लीय डकार को दूर करने में मदद करता है। यह भूख बढाता है और मतली से राहत दिलाने का काम करता है साथ ही संतरे का छिलका कृमि का नाश करने वाला व बुखार को मिटाने वाला भी होता है। इसलिए इन सभी रोगों के रोगियों को संतरे का छिलका पीसकर खिलाने पर फायदा होता है।

अनिद्रा की समस्या को दूर करता है- नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। जी हां नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। इस तेल का उपयोग तंत्रिकाओं को शांत करने व गहरी नींद के लिए किया जाता है। नहाने के पानी में इसका दो से तीन बूंद तेल डालिए और फिर देखिए कितनी मीठी नींद आती है।

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अनेक रोग नाशक भी है पपीता:
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पपीता एक ऐसा मधुर फल है जो सस्ता एवं सर्वत्र सुलभ है। यह फल प्राय: बारहों मास पाया जाता है। किन्तु फरवरी से मार्च तथा मई से अक्तूबर के बीच का समय पपीते की ऋतु मानी जाती है। कच्चे पपीते में विटामिन ‘ए’ तथा पके पपीते में विटामिन ‘सी’ की मात्रा भरपूर पायी जाती है।आयुर्वेद में पपीता (पपाया) को अनेक असाध्य रोगों को दूर करने वाला बताया गया है। संग्रहणी, आमाजीर्ण, मन्दाग्नि, पाण्डुरोग (पीलिया), प्लीहा वृध्दि, बन्ध्यत्व को दूर करने वाला, हृदय के लिए उपयोगी, रक्त के जमाव में उपयोगी होने के कारण पपीते का महत्व हमारे जीवन के लिए बहुत अधिक हो जाता है।पपीते के सेवन से चेहरे पर झुर्रियां पड़ना, बालों का झड़ना, कब्ज, पेट के कीड़े, वीर्यक्षय, स्कर्वी रोग, बवासीर, चर्मरोग, उच्च रक्तचाप, अनियमित मासिक धर्म आदि अनेक बीमारियां दूर हो जाती है। पपीते में कैल्शियम, फास्फोरस, लौह तत्व, विटामिन- ए, बी, सी, डी प्रोटीन, कार्बोज, खनिज आदि अनेक तत्व एक साथ हो जाते हैं। पपीते का बीमारी के अनुसार प्रयोग निम्नानुसार किया जा सकता है।१) पपीते में ‘कारपेन या कार्पेइन’ नामक एक क्षारीय तत्व होता है जो रक्त चाप को नियंत्रित करता है। इसी कारण उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के रोगी को एक पपीता (कच्चा) नियमित रूप से खाते रहना चाहिए।२) बवासीर एक अत्यंत ही कष्टदायक रोग है चाहे वह खूनी बवासीर हो या बादी (सूखा) बवासीर। बवासीर के रोगियों को प्रतिदिन एक पका पपीता खाते रहना चाहिए। बवासीर के मस्सों पर कच्चे पपीते के दूध को लगाते रहने से काफी फायदा होता है।३) पपीता यकृत तथा लिवर को पुष्ट करके उसे बल प्रदान करता है। पीलिया रोग में जबकि यकृत अत्यन्त कमजोर हो जाता है, पपीते का सेवन बहुत लाभदायक होता है। पीलिया के रोगी को प्रतिदिन एक पका पपीता अवश्य खाना चाहिए। इससे तिल्ली को भी लाभ पहुंचाया है तथा पाचन शक्ति भी सुधरती है।४) महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म एक आम शिकायत होती है। समय से पहले या समय के बाद मासिक आना, अधिक या कम स्राव का आना, दर्द के साथ मासिक का आना आदि से पीड़ित महिलाओं को ढाई सौ ग्राम पका पपीता प्रतिदिन कम से कम एक माह तक अवश्य ही सेवन करना चाहिए। इससे मासिक धर्म से संबंधित सभी परेशानियां दूर हो जाती है।५) जिन प्रसूता को दूध कम बनता हो, उन्हें प्रतिदिन कच्चे पपीते का सेवन करना चाहिए। सब्जी के रूप में भी इसका सेवन किया जा सकता है।

६) सौंदर्य वृध्दि के लिए भी पपीते का इस्तेमाल किया जाता है। पपीते को चेहरे पर रगड़ने से चेहरे पर व्याप्त कील मुंहासे, कालिमा व मैल दूर हो जाते हैं तथा एक नया निखार आ जाता है। इसके लगाने से त्वचा कोमल व लावण्ययुक्त हो जाती है। इसके लिए हमेशा पके पपीते का ही प्रयोग करना चाहिए।

७) कब्ज सौ रोगों की जड़ है। अधिकांश लोगों को कब्ज होने की शिकायत होती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे रात्रि भोजन के बाद पपीते का सेवन नियमित रूप से करते रहें। इससे सुबह दस्त साफ होता है तथा कब्ज दूर हो जाता है।

८) समय से पूर्व चेहरे पर झुर्रियां आना बुढ़ापे की निशानी है। अच्छे पके हुए पपीते के गूदे को उबटन की तरह चेहरे पर लगायें। आधा घंटा लगा रहने दें। जब वह सूख जाये तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें तथा मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें। ऐसा कम से कम एक माह तक नियमित करें।

९) नए जूते-चप्पल पहनने पर उसकी रगड़ लगने से पैरों में छाले हो जाते हैं। यदि इन पर कच्चे पपीते का रस लगाया जाए तो वे शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

१०) पपीता वीर्यवर्ध्दक भी है। जिन पुरुषों को वीर्य कम बनता है और वीर्य में शुक्राणु भी कम हों, उन्हें नियमित रूप से पपीते का सेवन करना चाहिए।

११) हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदायक होता है। अगर वे पपीते के पत्तों का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से एक कप की मात्रा में रोज पीते हैं तो अतिशय लाभ होता है।

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कब्ज से राहत दिलाए
इसमे बहुत ज्यादा रेशा होता है जिसकी वजह से पाचन क्रिया अच्छे से होती है और पेट दरुस्त रहता है। इस वजह से कब्ज की समस्या कभी नहीं हो पाती।मांसपेशियों के दर्द में राहत देती है :
पत्ता गोभी में लैक्टिक एसिड काफी मात्रा में होती है जो मांसपेशियों के चोटिल होने और उसे रिकवर करने में काफी सहायक होती है।

पेप्टिक अल्सर के इलाज में सहायक :
पत्ता गोभी, पेप्टिक अल्सर के इलाज में सहायक होती है। इस रोग से पीडित व्यक्ति अगर वंदगोभी का नियमित सेवन करें तो उसे आराम मिल सकता है क्योंकि इसमें ग्लूटामाइन होता है जो अल्सर विरोधी होता है।

अल्माइजर को कम कर देता है :
हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि पत्ता गोभी के सेवन से अल्माइजर जैसी समस्याएं दूर हो जाती है। इसमें विटामिन के भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे अल्माइजर की समस्या दूर हो जाती है।

मोतियाबिंद के खतरे को कम करता है :
पत्ता गोभी के सेवन से मोतियाबिंद का खतरा कम होता है। इसके लगातार सेवन से बॉडी में बीटा केराटिन बढ़ जाता है जिससे आंखे सही रहती है।

एंटी – फ्लैममेट्रोरी प्रॉपर्टी :
यह अमीनो एसिड में सबसे समृद्ध होता है जो सूजन आदि को कम करता है।

इम्यूनिटी को बढ़ाता है :
पत्ता गोभी, शरीर में इम्यूनिटी सिस्टम को स्ट्रांग बनाती है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जिससे बॉडी का इम्यूनिटी सिस्टम काफी मजबूत हो जाता है।

कैंसर को रोकने में मदद करता है :
वंदगोभी में ऐसे तत्व होते है जो कैंसर की रोकथाम करने और उसे होने से बचाने में मदद करता है। इसमें डिनडॉलीमेथेन ( डीआईएम ), सिनीग्रिन, ल्यूपेल, सल्फोरेन और इंडोल – 3 – कार्बीनॉल ( 13 सी) जैसे लाभदायक तत्व होते है। ये सभी कैंसर से बचाव करने में सहायक होते है।

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घरेलू अचूक नुस्खे :

• एसिडिटी :

1. खाने से पहले दो चम्मच शहद पर थोड़ा-सा दालचीनी पावडर बुरककर चाटने से एसिडिटी में राहत मिलती है और खाना अच्छे से पचता है।

2.सीने में जलन, खट्टी डकार जैसा महसूस हो तो पानी में नींबू का रस डालकर पिएं। नींबू के पाचक गुणों के कारण ये सारी तकलीफें दूर हो जाएंगी। नींबू का अचार भी भोजन के साथ प्रयोग करना काफी लाभकारी रहता है।

• सिर दर्द :

1.सिर दर्द होने पर गुनगुने पानी में अदरक व नीबू का रस व थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है।

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कुछ खास हैं “बेर” में

→ त्वचा पर कट या घाव होने पर फल का गुदा घिसकर लगाने से घाव जल्दी भरता हैं।

→ फेंफडे सम्बन्धी बीमारी और बुखार ठीक करने के लिए इसका जूस बेहद लाभकारी माना जाता है।

→ बेर को नमक और काली मिर्च के साथ खाने से अपच की समस्या दूर होती हैं।

→ सूखे हुए बेर खाने से कब्जियत और पेट सम्बन्धित पुरानी बीमारी भी दूर होती हैं।

→ बेर को छाछ के साथ लेने से घबराहट और उलटी होना और पेट में दर्द की समस्या ख़त्म होती है।

→ बेर की पत्तियां तेल के साथ लुग्दी बनाकर शरीर पर लगाने से लीवर सम्बन्धी समस्या में लाभ मिलता हैं।

→ बेर के नियमित सेवन से अस्थमा और मसूडो के घाव को भरने में मदद मिलती हैं।

→ बेर की जड़ों का जूस थोड़ी सी मात्रा मे पिने से गठिया और वात जैसी बीमारी को न केवल कम किया जा सकता है, बल्कि बढने से भी रोका जा सकता है।

→ बेर का फल खुश्की और थकान दूर करने की ताकत रखते हैं।

→ बेर और नीम के पत्ते पीसकर लगाने से सिर के बाल गिरने कम होते है।

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डायबिटीज से बचना है तो खाएं जामुन, चॉकलेट
एक अध्ययन में पता चला है कि जामुन, चाय और चॉकलेट का हर रोज पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से मधुमेह का खतरा कम रहता है। ईस्ट एंजेलिया विश्वविद्यालय एवं ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के मुताबिक जामुन, चाय और चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड एवं एंथोसाइनिंस का उच्च स्तर टाइप 2 मधुमेह से रक्षा करता है।.

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^ केला खाए ताकतवर हो जाये

केला हर मौसम में सरलता से उपलब्ध होने वाला अत्यंत पौष्टिक एवं स्वादिष्ट फल है। केला रोचक, मधुर, शक्तिशाली, वीर्य व मांस बढ़ाने वाला, नेत्रदोष में हितकारी है। पके केले के नियमित सेवन से शरीर पुष्ट होता है। यह कफ, रक्तपित, वात और प्रदर के उपद्रवों को नष्ट करता है।

केले के पेड़ को यदि हम देखे तो केले का हर हिस्सा काम का होता है,चाहे पत्ता हो,तना हो, फल (कच्चा पका दोनों)हो,जड़ हो फूल हो, सभी बड़े महत्वपूर्ण है. यहाँ तक कि जब केले पर कालिमा आ जाए तो हम उसे सडा जानकार फेक देते है, उस समय केला और पौष्टिक हो जाता है.केला कभी सड़ता नहीं है.

केले में मुख्यतः विटामिन-ए, विटामिन-सी,थायमिन, राइबो-फ्लेविन, नियासिन तथा अन्य खनिज तत्व होते है. इसमें जल का अंश 64.3 प्रतिशत ,प्रोटीन 1.3 प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट 24.7 प्रतिशत तथा चिकनाई 8.3 प्रतिशत है.

शक्तिवर्धक :- एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच घी, पिसी हुई इलाइची व शहद मिला कर केला खाने से शरीर सुन्दर और बलशाली होता है, बल, वीर्य, शुक्राणु ,काम-शक्ति और मष्तिस्क शक्ति बढ़ती है . दही में केला और पीसी हुई मिश्री मिलाकर खाने से भी मोटापा बढ़ता है.

बलवृद्धि के लिए व्यायाम तथा खेलकूद के बाद केला खाना चाहिए. केले में कार्बोहाईड्रेट पर्याप्त मात्र में होता है जो सरलता से पच जाता है , छोटे बच्चे को आसानी से दिया जा सकता है. यह बच्चों के लिए उतम आहार है. इसे मसलकर दूध में मिलकर खिलाने से अधिक फायदा होता है. यह खून में वृद्धि करके शरीर की ताकत बढाता है. नित्य केले का सेवन अगर दूध के साथ किया जाए तो कुछ ही दिनों में स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है.

केले को पकाने के लिए इथियन एवं कैल्सियम कार्बाइड रसायन का पानी के घोल में डुबाया जाता है इससे केले पक जाते है. ये रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इनसे केले के पौष्टिक तत्व भी नष्ट हो जाते है, इसलिए प्राकृतिक तरीके या वर्फ से पकाया ही खाना चाहिए. चितलीदार केला रसायनों से पकाया जाता है. अतः इसे नहीं खाना चाहिए. बिना धुले केला या अन्य कोई भी फल हानिकारक हो सकता है.

कच्चे केले की सब्जी बहुत ताकतवर और पौष्टिक होती है मगर कच्चा केला आप ऐसे ही कभी न खाएं उसे सब्जी के रूप में ही खाएं.केले को अगर दूध में मिक्स करके खाया जाये तो यह पूरे भोजन की ताकत दे देता है. फिर आप दिन भर भोजन न भी करें तो कमजोरी महसूस नहीं होगी. केला छोटे बच्चों के लिए उत्तम व पौष्टिक आहार है। इसे मसलकर या दूध में फेंटकर खिलाने से लाभ मिलता है।

केले में उपस्थित तत्व – इसमें पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम, मैगनीज, कापर, आयरन, फास्पोरस,सल्फर, आयोडीन, अलुमिनियम, जिंक, कोबाल्ट, सिट्रिक एसिड, मैलिक एसिड ,आक्जेलिक एसिड तथा केले के फूल में डोपामाइन, कैफिक एसिड, गेलिक एसिड, प्रोतोकेतेच्विक एसिड, कम्पेस्तेराल, फेरुलिक एसिड, स्तीग्मास्तीराल, डोपानोराद्रेनालिन , सेलेनाल ग्लायकोसाइड्स ,सिनामिक एसिड आदि तत्व पाए जाते हैं.

पेचिश रोग में – पेचिश रोग में थोड़े-से दही में केला मिलाकर सेवन से फायदा होता है।पेट में जलन होने पर दही में चीनी और पका केला मिलाकर खाएं । इससे पेट संबंधी अन्य रोग भी दूर होते हैं।अल्सर के रोगियों के लिए कच्चे केले का सेवन रामबाण औषधि है।

खाँसी में – एक पके केले में आठ साबुत काली मिर्च भर दें, वापस छिलका लगाकर खुले स्थान पर रख दें। शौच जाने के पूर्व प्रातः काली मिर्च निकालकर खा जाएँ , फिर ऊपर से केला भी खा जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने से हर तरह की खाँसी ठीक हो जाती है।अगर किसी को काली खांसी हो गयी है तो केले के तने को सुखाकर फिर जला कर जो राख बचती है वह दो-तीन चुटकी लीजिये और शहद मिला कर चटा दीजिये . काली खांसी जड़ से ख़त्म हो जाएगी.

जलने पर – आग से बदन का कोई हिस्सा जल गया हो तो वहाँ केले को मसल कर रख दीजिये और ऊपर से कपडे से बाँध दीजिये.जलन भी कम होगी और घाव भी ठीक होगा.

पथरी में – केले के तने की भस्म को पानी में घोल कर पीने से मूत्राशय की पथरी गल के निकल जाती है .केले का रस पीने से खुल कर पेशाब आता है और मूत्राशय (यूरीन ब्लैडर) साफ़ हो जाता है.जिससे देह में संचित रोग के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं. परिणामतः रोग भी नष्ट हो जाते हैं.केला अगर एक निश्चित मात्रा में रोज खाया जाए तो ये किडनी को मजबूत बनाता है.
बहुत ज्यादा यूरीन हो रहा हो तो भी आप एक या दो कच्चा केला खा सकते हैं.

शारीरिक कमजोरी में – जिनकी पाचन शक्ति कमजोर हो, तो केले को सुखाकर पीसकर केले का आटा बनाकर, केले के आटे की रोटी खानी से कमजोर पाचन शक्ति ठीक हो जाती है. केला सुखाकर पीसकर उसका पावडर बना कर रख लीजिये. इस पावडर को छोटे बच्चों को ५ ग्राम की मात्र में रोज खिला दीजिये.६ महीने तक खिलाने से कमजोर बच्चा पहलवान जैसा मजबूत हो जाएगा. चहरे पर चमक भी आ जाएगी.

कोलेस्ट्रॉल – केले में मैग्नीशियम की काफी मात्रा होती है जिससे शरीर की धमनियों में खून पतला रहने के कारण खून का बहाव सही रहता है। इसके अलावा पूर्ण मात्रा में मैग्नीशियम लेने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है।

संग्रहणी – किसी को संग्रहणी की शिकायत हो तो वह पके केले के साथ इमली और नमक खाए , यह मिश्रण संग्रहणी दूर कर देता है.हैजे से ग्रसित रोगी को सुबह शाम एक एक पका केला जरूर खिला देना चाहिए

सांस से सम्बंधित बीमारी में – सांस से सम्बंधित कोई बीमारी हो तो एक केला लीजिये ,उसमे बीच में चीरा लगाकर काली मिर्च का ३-४ ग्राम पावडर भर के रात भर रख दीजिये, सवेरे इस केले को तवे पर ज़रा सा देशी घी डाल कर सेंक लीजिये.फिर खा लीजिये. ३ दिन लगातार यही काम करे. सांस की बीमारी ख़त्म.
बबासीर में – एक केले को बीच से चीरा लगाकर चना बराबर कपूर बीच में रख दे फिर इसे खाए इससे बबासीर एकदम ठीक हो जाती है.

माहवारी में – अगर महिलाओं को माहवारी के समय बहुत ज्यादा रक्तस्राव होता हो तो केले के फूलों का रस निकाल कर उसे दही मिला कर पी लें. इस दवा से पतले दस्त में भी बहुत फायदा होता है.

ब्लड सुगर- केले के फूलों का सत मिल जाए तो इसे ब्लड सुगर को कंट्रोल करने के लिए रोजाना एक चुटकी खा लीजिये. बहुत अचूक दवा है.

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मक्की के फायदे

ताजे दूधिया मक्का के दाने पीसकर शीशी में भरकर खुली हुई शीशी धूप में रखें। दूध सूख कर उड़ जाएगा और तेल शीशी में रह जाएगा। छान कर तेल को शीशी में भर लें और मालिश किया करें। दुर्बल बच्चों के पैरों पर मालिश करने से बच्चा जल्दी चलेगा। एक चम्मच तेल शर्बत में मिलाकर पीने से बल बढ़ता है।
भुट्टा जलाकर उसकी राख पीस लें। इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक मिला लें। नित्य चार बार चौथाई चम्मच गर्म पानी से फं की लें खांसी में लाभ होगा।
ताजा मक्का के भुट्टे पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन गुर्दों की कमजोरी दूर हो जाती है।
मक्का के भुट्टे जलाकर राख कर लें। जौ जलाकर राख कर लें। दोनों को अलग-अलग पीस कर अलग-अलग शीशियों में भरकर उन शीशियों पर नाम लिख दें। एक कप पानी में दो चम्मच मक्का की राख घोलें फि र छानकर इस पानी को पी लें।
इससे पथरी गलती है पेशाब साफ आता है। जिसे टीबी का पूर्वरूप हो उसे मक्का की रोटी खानी चाहिए।
गरमा-गरम भुट्टे और उसके विविध व्यंजन खाने का एक अलग ही मजा है। भुट्टा ग्रेमिनी कुल का एक प्रसिद्ध धान्य है।
आयुर्वेद के अनुसार कच्ची मक्का का भुट्टा तृप्तिदायक वातकारक कफ पित्त नाशक मधुर और रुचि उत्पादक अनाज है।
भुट्टे में पौष्टिक तत्व कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से प्रोटीन होता है। हालांकि इस प्रोटीन को अपूर्ण प्रोटीन माना गया है । सौ ग्राम भुट्टे के दानों से काफी कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। भुट्टे के 100 ग्राम दानों ;कच्ची मक्का में काफी पोषक तत्वों की मात्रा खनिज एवं विटामिन पाए जाते हैं।
औषधीय गुण
’ मक्का के ताजे दानों को पानी में अच्छी तरह से उबालकर उस पानी को छानकर शहद या मिश्री मिलाकर सेवन करने से गुर्दों की कमजोरी दूर होती है।
’ मक्का के दाने भूनकर खाने से पाचन तंत्र के रोग दूर होते हैं।
’ भूना हुआ भुट्टा खाने से दांत एवं दाढ़ मजबूत होते हैं तथा ये दाने लार बनाने में भी सहायक हैं जिससे मुख व दांतों की दुर्गंध भी दूर होती है।

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सर्दियों में बादाम से ज्यादा असरदार है चना, रोज खाएंगे तो होंगे ये ढेरों फायदे
____________________________________________________सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। आयुर्वेद मे माना गया है कि चना और चने की दाल दोनों के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। चना खाने से अनेक रोगों की चिकित्सा हो जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है, क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लड़ने की क्षमता है। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है। मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें। अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं। चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।

सर्दियों में चने के आटे का हलवा कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। यह हलवा वात से होने वाले रोगों में व अस्थमा में फायदेमंद होता है।

रात को चने की दाल भिगों दें सुबह पीसकर चीनी व पानी मिलाकर पीएं। इससे मानसिक तनाव व उन्माद की स्थिति में राहत मिलती है। 50 ग्राम चने उबालकर मसल लें। यह जल गर्म-गर्म लगभग एक महीने तक सेवन करने से जलोदर रोग दूर हो जाता है।

चने के आटे की की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं। भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।

25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है। यदि समान मात्रा में जौ चने की रोटी भी दोनों समय खाई जाए तो जल्दी फायदा होगा।
चने को पानी में भिगो दें उसके बाद चना निकालकर पानी को पी जाएं। शहद मिलाकर पीने से किन्हीं भी कारणों से उत्पन्न नपुंसकता समाप्त हो जाती है।

हिचकी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से शीत के कारण आने वाली हिचकी तथा आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।
पीलिया में चने की दाल लगभग 100 ग्राम को दो गिलास जल में भिगोकर उसके बाद दाल पानी में से निकलाकर 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4-5 दिन तक खाएं राहत मिलेगी।

देसी काले चने 25-30 ग्राम लेकर उनमें 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला लें चने को कुछ घंटों के लिए भिगो दें। उसके बाद चने को किसी कपड़े में बांध कर अंकुरित कर लें। सुबह नाश्ते के रूप में इन्हे खूब चबा चबाकर खाएं।
बुखार में ज्यादा पसीना आए तो भूने को पीसकर अजवायन और वच का चूर्ण मिलाकर मालिश करनी चाहिए।

चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।

दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।

गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है। बार-बार पेशाब जाने की बीमारी में भुने हूए चनों का सेवन करना चाहिए। गुड़ व चना खाने से भी मूत्र से संबंधित समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।

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कुछ सोचने वाली बाते::
ज्यादातर लोग आज की बनी रोटी कल खाना पसंद नहीं करेंगे, कुछ तो ऐसे भी है जो सुबह की बनी रोटी शाम को भी नही खाते, अब मैं अगर आपसे बोलूँ की आज रोटी बनाकर उसको पौलिथीन में पैक कर देता हूँ, उसको ४ दिन बाद खाने को कौन राजी होगा?
आप सोच रहे होंगे की क्या बेतुकी बातें कर रहा हूँ, अब जरा सोचो की आटे को सड़ाकर बनाई हुई ब्रेड और पाँव रोटी जो पता नही कितने दिन पहले की बनी हुई है, उसको इतना मजे ले कर क्यों खाते हो ? क्यों बर्गर और ब्रेड पकोड़ा खाते वक्त ये बातें दिमाग में नही आती हैं ?
अगर हम ताजा रोटी खाने की परम्परा को दकियानुसी मान कर ४-५ दिन पहले बनी बासी रोटी खाने को अपनी शान समझते है तो हम पढ़े लिखे मूर्खो के सिवा और कुछ नही है, यूरोप के गधों के पीछे आँख बंद कर चलने वाली भेड़ चाल को हमें छोड़ना ही होगा, यूरोप में ब्रेड खाना उनकी मज़बूरी है, वहाँ का तापमान इतना कम रहता है की रोटी बनाना संभव ही नही है, वहाँ कई महीने तो बर्फ जमी रहती है, इसीलिए वहाँ ब्रेड बनाई जाती है, आटे को सड़ाकर ब्रेड बना दी जाती है, और अत्यंत कम तापमान की वजह से वो चार पांच दिनों तक खराब नही होती है, भारतीय जलवायु के हिसाब से ब्रेड उचित नहीं है, भारतीय जलवायु में ब्रेड जैसे नमीयुक्त खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होते हैं, तापमान बहुत कम होने के कारण उनके शरीर में मैदे से बनी ब्रैड पच जाती है पर भारत में तापमान बहुत अधिक होता है जो भारतीयों के लिये सही नही, इससे कब्ज की शिकायत होती है और कब्ज होने से सैंकडों बीमारियां लगती है, हजारों सालों से भारत में ताजे आटे को गूंथकर ही रोटी बनाई और खाई जाती है, हमारे पूर्वज इतने तो समझदार थे जो उन्होने ब्रैड आदि खाना शुरू नही किया तो आप भी समझदार बनिये,
गेहूँ के आटे के बारे में विज्ञान यह कहता है की इस आटे को गीला होने के 48 मिनट के अन्दर इसका रोटी बन जाना चाहिए और रोटी बनने के 48 मिनट के बाद इसको खा लिया जाना चाहिए | लेकिन पावरोटी और डबलरोटी का अगर कहानी सुनना और गिनना शुरू करेंगे तो वो तो ५-६ दिन पुराना होता है, उसको ख़राब कर कर के हम खा रहें है | और फिर बड़ा शान महसूस करते है, अपने आपको बड़ा स्मार्ट महसूस करते है … हम पावरोटी खाते है हम डबलरोटी खाते है .. स्मार्टनेस मानते है इसमें … अब ये Super idiocity है या smartness है इसको तय करने की अभी जरुरत है | पढ़े लिखे घरों में खासकर अंग्रेजी घरों में इस तरह के भोजन का इतनी तेजी से प्रवेश हुआ है की भारत का विविधतापूर्ण ब्यंजन अब उनके घरों से गायब हो गये है बाहर हो गए है |
इसीलिए सभी राष्ट्रभक्त भाई बहनों से निवेदन है की ब्रेड, पाँव रोटी जैसी चीजों से बने खाद्य पदार्थ का पूरी तरह से बहिष्कार करें और अन्य को भी प्रेरित करें।

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बल-बुद्धिनाशक चाय नहीं, आयुर्वेदिक चाय लें* चाय वीर्य को पतला बना देती है | -महात्मा नारायण स्वामी
* चाय ने हमारे हजारों स्त्री-पुरषों की भूख उड़ा दी है |-महात्मा गाँधी
* चाय-कॉफी से बुद्धि का नाश होता है |-स्वामी दयानंद सरस्वती
* चाय से अनिद्रा-रोग होता है, स्मरणशक्ति नष्ट होती है तथा मूत्राशय कमजोर हो जाता है |-एडमंड शेफोटसबरी
* चाय पीने से थकावट मिटती नहीं अपितु बढ़ती है -डॉ. खिस कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
* चाय से नासूर पैदा होता है |-डॉ. हंसकेसर वोंशिन्ग्टन (अमेरिका)
* चाय पीने से पेट की गड़बड़ियाँ बढ़ रही हैं |-डॉ. कार्तिकेय बोस
* चाय पीने से नेत्रों के नीचे कालापन और मानसिक उदासी छा जाती है |-डॉ. जे डब्ल्यू. मार्टिन
* चाय के बाद पेशाब में यूरिक एसिड दुगना हो जाता हैं |-प्रो. मेंडल
* बच्चों को चाय पिलाना शराब पिलाने से भी अधिक हानिकारक हैं |-डॉ. लीला क्लाइस्ट
* दिन में तीन कप चाय पीने से मासंपेशियों में खिंचाव, सनायुरोग, चिंता, भय, ह्रदयकम्प तथा मस्तिष्क के रोग हो जाते हैं|-डॉ. गिनमैन (अमेरिका)
* चाय-कॉफी से रक्तचाप बढ़ता है |-मारिस फिशबेन
* चाय-कॉफी का अधिक सेवन करनेवालों को स्वप्नदोष आदि बिमारियाँ हो जाती हैं |-हेरी मिलर
* चाय पीने से कब्ज होता है |-डॉ. ब्लाड
खाली पेट चाय-कॉफी से धातुनाश होता है, कमर कमजोर होती है, गुर्दे और वीर्यग्रंथियों को नुकसान पहुँचता है तथा ओज क्षीण व वीर्य पतला हो जाता है | अगर वीर्य ही पतला हो गया, ओज ही क्षीण हो गया तो इससे बड़ा घाटा और क्या हो सकता है? अत: सावधान! अपने और दूसरों के स्वास्थ्य की रक्षा करें, चाय से खुद बचें व दूसरों को बचायें |

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साधारण ” कारगर ” नुस्खे, जो हर दिन आपके काम आएंगे —
___________________________________________________- पके हुए केले को अच्छी तरह से मैश करें और चेहरे पर फेसपैक की तरह लगाएं। करीब 15 मिनट बाद धो लें। ऐसा करने से चेहरे की त्वचा में निखार आता है।

– दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू के रस का मिश्रण त्वचा पर लगाएं। करीब 20 मिनिट बाद इसे साफ कर लें, त्वचा नर्म और मुलायम हो जाएगी।

– एलोवेरा की पत्तियों से जेल निकालकर इसमें कुछ बूंदें नींबू रस की मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने से चेहरा चमकने लगता है।

– बादाम का तेल और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। थोड़ी देर रखने के बाद चेहरा धो लें। ऐसा करने से चेहरा निखर जाता है।

– व्हीट-ग्रास का जूस सुबह खाली पेट पीने से चेहरे की लालिमा बढ़ती है और खून भी साफ होता है।

– काली कोहनियों को साफ करने के लिए नींबू को दो भागों में काटें। उस पर खाने वाला सोडा डालकर कोहनियों पर रगड़ें। मैल साफ हो जाएगा, कोहनियां मुलायम हो जाएंगी।

– बालों में मेथी दाने का पेस्ट बनाकर लगाएं, रूसी दूर हो जाएगी।

– अरण्डी के तेल को नाखूनों की सतह पर कुछ देर हल्के हल्के मालिश करें। रोजाना सोने से पहले ऐसा करने से नाखूनों में चमक आ जाती है।

– एक चौथाई चम्मच मेथी दाना को पानी के साथ निगलने से अपचन की समस्या दूर होती है।

– मेथी के बीज आर्थराइटिस और साईटिका के दर्द से निजात दिलाने में मदद करते हैं। करीब 1 ग्राम मेथी दाना पाउडर और सोंठ पाउडर को मिलाकर गर्म पानी के साथ दिन में दो-तीन बार लेने से लाभ होता है।

– बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ व मिश्री तीनों को समान मात्रा में मिला लें। रोज इस मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें।आंखों की प्रॉब्लम्स दूर हो जाएंगी

– समान मात्रा में लेकर अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। इस मिश्रण को पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।

– धनिया, जीरा और चीनी तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से एसिडिटी के कारण होने वाली जलन शांत हो जाती है।

– दूध की मलाई और पिसी मिश्री मिलाकर खाने से कमजोरी दूर होती है।

– सफेद मूसली का एक चम्मच चूर्ण और एक चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर। सुबह और रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ एक चम्मच मात्रा में लेने से कमजोरी दूर हो जाती है।

– रोजाना सुबह एक से दो लहसुन की साबूत कलियां पानी से निगल लेने पर जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

– लहसुन की सिर्फ दो कलियों का रोजाना सेवन करने से आपके शरीर से बेड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम कर देता है।

– लहसुन की दो कलियों को छील छीलकर चबाया जाए तो ब्लडप्रेशर कंट्रोल में रहता है।

– संतरे के छिलकों का महीन चूर्ण बनाकर उसमें गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएं, मुहांसे दूर हो जाते हैं।

– एक गिलास गुनगुने पानी में दो छोटे चम्मच नींबू का रस मिलाकर लें। यह काम दिन में 8-10 बार करें। अर्थराइटिस के दर्द में आराम मिलेगा।

-आधा चम्मच मेथी का चूर्ण दही में मिलाकर सेवन करने से पेचिश दूर होती है।

– मेथी के पत्तों के रस में काली दाख मिलाकर सेवन करने से भी पेचिश दूर होता है।

– 1/2 चम्मच चिरौंजी को 2 चम्मच दूध में पीसकर पेस्ट बनाकर लगाएं, इससे चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।

– सफेद जीरे को घी में भूनकर इसका हलुवा बनाकर प्रसुता को खिलाने से दूध में बढ़ोतरी होती है।

– बहुत तेज सिरदर्द हो तो पुदीना का तेल हल्के हाथों से सिर पर लगाएं, सिरदर्द से राहत मिलेगी।

– दो-चार लौंग पीसकर उसका सिर पर लेप लगाने से सिरदर्द में जल्द आराम मिलता है।

– नमक में दो बूंद लौंग का तेल डालकर उसे सिर पर लगाएं, सिरदर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।

– मुंह के छाले की समस्या परेशान कर रही हो तो दिन में कम से कम तीन बार कच्चे दूध से अच्छी तरह गरारे करें, छाले मिट जाएंगे।

– खाना पकाने बाद आस-पास 1 या 2 लौंग को बर्तनों के पास रख दें तो चीटियां कभी परेशान नहीं करेंगी।

– सुपारी को बारीक पीस लें। इसमें लगभग 5 बूंद नींबू का रस और थोड़ा सा काला या सेंधा नमक मिलाएं। प्रतिदिन इस चूर्ण से मंजन करें। दांत चमक जाएंगे।।

– कब्ज होने पर रात्रि में सोते समय दस बारह मुनक्का दूध में उबाल कर खाएं और दूध पी लें।

– नारियल की गिरी में बादाम, अखरोट और मिश्री मिलाकर सेवन करने से याददाश्त बढ़ती है। नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से रूसी से छुटकारा मिलता है।

– नींबू में नारियल तेल मिला कर लगाया जाए तो यह बालों का झड़ना रोक देता है। नींबू के रस को अरण्डी का तेल या जैतून का तेल मिला कर बालों की मसाज करें। फिर1 घंटे के बाद बाल धो लें।

– सुबह खाली पेट प्रतिदिन एक सेब खाने से सिरदर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है।

– कीड़ा लगे दांत में थोड़ा सा हींग भर देने से दांत व दाढ़ का दर्द दूर हो जाता है।

– त्रिफला चूर्ण चार ग्राम (एक चम्मच भर) को 200 ग्राम हल्के गर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।

– प्याज के बीजों को सिरका में पीसकर दाद-खाज और खुजली वाले स्थान पर लगाने से तुरंत आराम मिलताहै।

– सौंफ ,जीरा और धनियां सब 1-1 चम्मच लेकर 1 गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। आधा गिलास पानी बच जाने पर उसमें एक चम्मच गाय का घी मिलाएं। सुबह-शाम पिएं खूनी बावासीर से रक्त गिरना बंद हो जाता है।

– बुखार की वजह से जलन होने पर पलाश के पत्तों का रस लगाने से जलन का असर कम हो जाता है।

– जीरे को मिश्री की चाशनी बनाकर उसमें या शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।

– करी पत्तों को सुबह खाली पेट खाएं। तीन महीनों तक नियमित रूप से ये प्रयोग करने पर डायबिटीज कंट्रोल में रहती है और मोटापा घटने लगता है।

– सेव काटकर टुकड़े तैयार कर लें। इन टुकड़ों को कप या छोटी कटोरी में डालकर कार की सीट्स के नीचे पलोर पर रख दें। एक दो दिन में ये टुकड़े सिकुड़ जाएंगे। एक बार फिर यही प्रक्रिया दोहराएं, धीरे- धीरे गंध दूर हो जाएगी।

– नींबू के रस में थोड़ी चीनी मिलाकर इसे गर्म कर सिरप बना लें। इसमें थोड़ा पानी मिलाकर पीएं। पित्त के लिए यह अचूक औषधि है।

health

स्त्रियाँ क्योँ लगाती हैँ माँग मेँ सिन्दूर और इसकी वैज्ञानिकता क्या?(1)भारतीय वैदिक परंपरा खासतौर पर हिंदू समाज में शादी के बाद महिलाओं को मांग में सिंदूर भरना आवश्यक हो जाता है। आधुनिक दौर में अब सिंदूर की जगह कुंकु और अन्य चीजों ने ले ली है। सवाल यह उठता है कि आखिर सिंदूर ही क्यों लगाया जाता है। दरअसल इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। यह मामला पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा है। सिर के उस स्था
न पर जहां मांग भरी जाने की परंपरा है, मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है,
जिसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं। यह अत्यंत संवेदनशील भी होती है।

यह मांग के स्थान यानी कपाल के अंत से लेकर सिर के मध्य तक होती है। सिंदूर इसलिए लगाया जाता है क्योंकि इसमें पारा नाम की धातु होती है। पारा ब्रह्मरंध्र के लिए औषधि का काम करता है। महिलाओं को तनाव से दूर रखता है और मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रखता है। विवाह के बाद ही मांग इसलिए भरी जाती है क्योंकि विवाहके बाद जब गृहस्थी का दबाव महिला पर आता है तो उसे तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी बीमारिया आमतौर पर घेर लेती हैं।पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है। यह मष्तिष्क के लिए लाभकारी है, इस कारण सिंदूर मांग में भरा जाता है।

(2)मांग में सिंन्दूर भरना औरतों के लिए सुहागिन होने की निशानी माना जाता है। विवाह के समय वर द्वारा वधू की मांग मे सिंदूर भरने के संस्कार को सुमंगली क्रिया कहते हैं।

इसके बाद विवाहिता पति के जीवित रहने तक आजीवन अपनी मांग में सिन्दूर भरती है। हिंदू धर्म के अनुसार मांग में सिंदूर भरना सुहागिन होने का प्रतीक है। सिंदूर नारी श्रंगार का भी एक महत्तवपूर्ण अंग है। सिंदूर मंगल-सूचक भी होता है। शरीर विज्ञान में भी सिंदूर का महत्त्व बताया गया है।

सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होनेके कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पडती। साथ ही इससे स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित होती है। मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है, वह स्थान ब्रारंध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है।
सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से भी बचाता है। सामुद्रिक शास्त्र में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने की सलाह दी गई है।
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ज्यादा टी.वी. देखने लगातार कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करने या अन्य कारणों से अक्सर देखने में आता है कि कम उम्र के लोगों को भी जल्दी ही मोटे नम्बर का चश्मा चढ़ जाता है। अगर आपको भी चश्मा लगा है तो आपका चश्मा उतर सकता है। नीचे बताए नुस्खों को चालीस दिनों तक प्रयोग में लाएं। निश्चित ही चश्मा उतर जाएगा साथ थी आंखों की रोशनी भी तेज होगी।सुबह नंगे पैर घास पर मार्निंग वॉक करें।

नियमित रूप से अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।

बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ और मिश्री तीनों का पावडर बनाकर रोज एक चम्मच एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें।

त्रिफला के पानी से आंखें धोने से आंखों की रोशनी तेज होती है।

पैर के तलवों में सरसों का तेल मालिश करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।

सुबह उठते ही मुंह में ठण्डा पानी भरकर मुंह फुलाकर आंखों पर छींटे मारने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।.

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माइक्रोवेव

मानव शरीर कि प्रकृति विद्युत रासायनिक है । कोई भी शक्ति जो मनुष्य के विद्युत रासायनिक व्यवस्था को बाधित करता है वो शरीर के शरीरक्रिया व्यवस्था को भी प्रभावित करेगा ।

सूक्ष्मतरंग चूल्हा, या माइक्रोवेव ओवन (60 to 90 GHz) एक रसोईघर उपकरण है जो कि खाना पकाने और खाने को गर्म करने के काम आता है। इस कार्य के लिये यह चूल्हा द्विविद्युतीय (dielectric) उष्मा का प्रयोग करता है। यह खाने के भीतर उपस्थित पानी और अन्य ध्रुवीय अणुओं को सूक्ष्मतरंग विकिरण का उपयोग करके गर्म करता है। मैग्नेट्रॉन इसका मुख्य अवयव है जो सूक्ष्मतरंगे पैदा करता है।

माइक्रोवेव ओवन का इतिहास :

माइक्रोवेव ओवन मूलतः नाजियों द्वारा अपने mobile support operations में उपयोग के लिए विकसित किया गया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद माइक्रोवेव ओवन पर जर्मनों द्वारा किया गया चिकित्सा अनुसंधान मित्र शक्ति के हात लगा। सोवियत संघ ने भी कुछ माइक्रोवेव ओवन निकाल लिया और उनके जैविक प्रभाव पर सबसे अधिक गहन शोध किया। और सोवियत संघ ने माइक्रोवेव ओवन की स्वास्थ्य के खतरों पर एक अंतरराष्ट्रीय (जैविक और पर्यावरण) चेतावनी जारी किया । अन्य पूर्वी यूरोपीय वैज्ञानिकों ने भी माइक्रोवेव विकिरण के हानिकारक प्रभावों की सूचना दी और इसके सख्त पर्यावरण सीमा निर्धारित किया। पर किसी अज्ञात कारणों से अमेरिका ने इसके हानिकारक प्रभावों के यूरोपीय रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया।

माइक्रोवेव ओवन के सूक्ष्मतरंग विकिरण भोजन को जेहरिला बना देता है –
## उसमे कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों का गठन होता है :

1. मांस माइक्रोवेव ओवन में पकाने से उसमे d-Nitrosodiethanolamines नामक एक कैंसर पैदा करने वाली तत्व का गठन होता है ।

2. दूध और अनाज माइक्रोवेव ओवन में गरम करने या पकाने से उनके कुछ अमीनो एसिड परिवर्तित होक कैंसर पैदा करने वाली तत्व बन जाता है ।

3. बेबी फ़ूड को माइक्रोवेव ओवन में गरम करने से उसमे एक ऐसा तत्व उतपन्न होता है जो बच्चे की तंत्रिका तंत्र और गुर्दे के लिए ज़हर होता है ।

## भोजन की पोषक तत्वों के विनाश होता है :

1. रूसि शोधकर्ताओं ने अपने माइक्रोवेव ओवन परीक्षण में सभी खाद्य पदार्थों में 60 से 90% Food Value की कमी पायी ।

2. माइक्रोवेव ओवन में पके सभी खाद्य पदार्थों में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी, विटामिन ई, आवश्यक खनिज और lipotropic कारकों की कमी पायी गयी ।

पैकेजिंग से खाद्य पदार्थों में विषैले रसायनों की रिसाव होता है :

1. माइक्रोवेव खाद्य पदार्थों जैसे पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज़, पॉपकॉर्न के ऊष्मा-शोशक पैकेजिंग से कई जहरीले रसायनों के रिसाव उसमे होता है ।
माइक्रोवेव ओवेन में पका खाना खानेवालों के शारीर में क्या होता है ?

माइक्रोवेव में पके खाद्य पदार्थों के उपभोगताओं में पैथोजेनिक परिवर्तन पाया गया है, जैसे :

1. लसीका संबंधी विकार पाया गया जो कुछ प्रकार के कैंसर रोकने कि क्षमता को कम किया ।
2. रक्त में कैंसर सेल के गठन दर की वृद्धि हुई ।
3. पेट और आंतों के कैंसर होने की दर में बृद्धि आई ।
4. पाचन विकार की उच्च दर और उन्मूलन प्रणालियों के टूटने का क्रम देखा गया ।

माइक्रोवेव ओवेन में गरम किया हुआ रक्त से मौत :

1991 में अमेरिका में एक मुकदमा नोर्मा लेविट नामक व्यक्ति के मौत से संबंधित था जो एक साधारण से कूल्हे की सर्जरी के बाद खून चढ़ाने से निधन हो गया । नर्स ने गलती से खून चढ़ाने से पहले उसको माइक्रोवेव ओवन में गरम किया था । महिला की मृत्यु हो गई थी जब उसने रक्त प्राप्त किया । रक्त चढ़ाने से पहले नियमित तौर पर गर्म किया जाता है लेकिन नहीं माइक्रोवेव ओवन में नही । इस घटना से पता चलता है कि माइक्रोवेव ओवन में गरम करने के दौरान रक्त एक घातक पदार्थ में बदल गया था ।

माइक्रोवेव बीमारी :

1950 में रडार के विकास के दौरान रुसीओं ने हजारो श्रमिको के ऊपर माइक्रोवेव के संपर्क में आने पर शोध किया था । उस शोध रिपोर्ट में बताया है .. इसका पहला लक्षण कम रक्तचाप और धीमी नाड़ी हैं , बाद में संवेदनिक तंत्रिका प्रणाली में उत्तेजना और उच्च रक्तचाप है । इस चरण में अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना, आंख में दर्द, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, चिंता, पेट दर्द, तंत्रिका तनाव, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, बालों के झड़न, पथरी, मोतियाबिंद, प्रजनन समस्याओं, और कैंसर की वृद्धि की घटना भी शामिल है । बाद में अधिवृक्क थकावट और हृदय रोग जैसे कोरोनरी धमनियों कि रुकावट और दिल का दौरा पड़ना भी शामिल है । .

Microwave story in hindi

सर्दी के दिनों की एक सुबह वो अपने नियमित प्रात कालीन भ्रमण पर जा रहा था, ठण्ड बहुत तेज थी हाथ पैर जमे जा रहे थे, उपर से नीचे तक गरम कपडे होने के बावजूद ठण्ड थी की रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी, तभी उसकी निगाह सडक किनारे ठण्ड से ठिठुरते एक गरीब परिवार पर पड़ी जहाँ माता पिता अपने दोनों बच्चो को सर्दी से बचाने के लिए उनको अपने बदन से चिपका कर पड़े थे और खुद भरी ठण्ड का सामना कर रहे थे, यकायक जैसे समय ठहर गया इस मार्मिक दृश्य को देख उसकी आँखे भर आई, मन ही मन उसने कुछ निश्चय किया और उसके कदम मजबूती से वापस अपने घर की तरफ लौट पड़े, सर्वप्रथम उसने उस परिवार को तात्कालिक राहत प्रदान की और फिर वो निकल पड़ा अपने अभियान पर . . .
आज उस एक आदमी के प्रयासों द्वरा देश में पहली बार कोटा (राजस्थान) में पूरी तरह से जनसहयोग से चलने वाले “वस्त्र बेंक” की स्थापना हुई, आज लगातार दो साल से चल रहे इस “निशुल्क परिधान केंद्र ” पर रोजाना शहर के अनेक व्यक्ति आकर अपने पुराने वस्त्र दान कर जातें हैं, यहाँ पर मोजूद एक टीम इन वस्त्रो में से पुनः उपयोग होने लायक वस्त्रो को अलग कर देती हैं तत्पश्चात उन वस्त्रो को रफू एवं मरम्मत के लिए दर्जी को दे दिया जाता है,रफू और मरम्मत के बाद इन कपड़ो को अच्छे से धुलाई और इस्त्री करके हेन्गर्स में लगा दिया जाता है और फिर शहर का कोई भी व्यक्ति चाहे वो छोटा हो बड़ा हो ,किसी भी धर्म जाती का हो यहाँ जाकर मुफ्त में अपने लायक वस्त्र ले सकता हैं ,और एक बात केंद्र पर मोजूद टीम बाकायदा वस्त्रो की फिटिंग उस व्यक्ति के अनुसार बना कर उसको प्रदान करतें हैं,आज लगभग दो साल से इस केंद्र द्वारा लाखो नंगे तनो को ढका जा चुका हैं और ये यात्रा अनवरत जारी हैं ,
दोस्तों आप जानना चाहेंगे उस शख्स का नाम जिसने ये सपना देखा और उसको पूरा किया वो हैं राजस्थान के कोटा शहर के भाजपा विधायक ” श्री ओम बिरला ” , शायद ये बिरला जी द्वरा किये गये इस प्रकार के कामो का ही नतीजा हैं की यहाँ की जनता ने इनको सर माथे पर बिठाया है और ये अपने क्षेत्र में पिछले 10 वर्षो से लगातार जीतते आ रहें हैं . .
ऐसे महान शख्स को हमारा प्रणाम

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गजब का रूम फ्रेशनर::
खट्टे मौसमी फलों के छिलकों को कचरे के साथ यूं ना फेंके..संतरा, नींबू, मौसंबी आदि के छिलकों को एक बर्तन में पानी के साथ खौलाएं, खौलाने से पहले थोडी सी दालचीनी और ३-४ लौंग जरूर डाल दें…जब यह खौलने लगे तो सावधानी से हर कमरे में खौलते बर्तन को ले जांए..इसकी सुगंध मात्र से करीब १२ प्रकार के सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं..और यह गजब का रूम फ्रेशनर भी होता है..है ना कमाल का आईडिया..

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चुकंदर का सेवन अधिकतर लोग सलाद के रूप में या जूस बनाकर करते हैं। इसके लाल रंग के कारण अधिकतर लोग सिर्फ इसे खून बढ़ाने वाली चीज के रूप में ही जानते हैं और इसका उपयोग भी इसीलिए करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं इसे खाने के एक नहीं अनेक फायदे हैं। आज हम बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही फायदों के बारे में…..गुणों से भरपूर- सोडियम पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते है इसे खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है।उम्र के साथ ऊर्जा व शक्ति कम होने लगती है, चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी ऊर्जा का संचार करता है। इसमें एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो हमेशा जवान बनाएं रखते हैं।त्वचा के लिए फायदेमंद- यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का खा लीजिये। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर की एनर्जी बढाता है।सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है।दिल की बीमारियां- चुकंदर में नाइट्रेट नामक रसायन होता है जो रक्त के दबाव को काफी कम कर देता है और दिल की बीमारी के जोखिम को भी कम करता है। चुकंदर एनीमिया के उपचार में बहुत उपयोगी माना जाता है। यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय रखने की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने की क्षमता भी बढ़ जाती है।

हाई ब्लड प्रेशर में- लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रोज चुकंदर का जूस पीने वाले मरीजों को अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने रोज चुकंदर का मिक्स जूस [गाजर या सेब के साथ] पीने वाले मरीजों के हाई ब्लड प्रेशर में कमी पाई। अध्ययन के मुताबिक रोजाना केवल दो कप चुकंदर का मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका ज्यादा सेवन घातक साबित हो सकता है।

कब्ज और बवासीर-चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है।
लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उन्हें खाने के साथ चुकंदर खाना चाहिए। इससे शरीर में एनर्जी बढती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है।

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अजीनोमोटो::

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले
के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में यह धीमा जहर खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।
जान लें कि कैसे-
* सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।
* इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
* इसका ज्यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।
* पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।
* अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।
* उच्च रक्तचाप की समस्या से घिरे लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।
* व्यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।
* अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।
*अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल
जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है। इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए। इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है। छिपा हो सकता है अजीनोमोटो अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है Hydrolyzed groundnut protein और स्वाद वर्धक 635 Disodium ribonucleotides यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है। जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

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मुंह में अगर छाले हो जाएं तो जीना मुहाल हो जाता है। खाना तो दूर पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन, इसका इलाज आपके आसपास ही मौजूद है। मुंह के छाले गालों के अंदर और जीभ पर होते हैं। संतुलित आहार, पेट में दिक्कत, पान-मसालों का सेवन छाले का प्रमुख कारण है। छाले होने पर बहुत तेज दर्द होता है। आइए हम आपको मुंह के छालों से बचने के लिए घरेलू उपचार बताते हैं।

मुंह के छालों से बचने के घरेलू उपचार–

शहद में मुलहठी का चूर्ण मिलाकर इसका लेप मुंह के छालों पर करें और लार को मुंह से बाहर टपकने दें।

मुंह में छाले होने पर अडूसा के 2-3 पत्तों को चबाकर उनका रस चूसना चाहिए।
छाले होने पर कत्था और मुलहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुंह के छालों परलगाने चाहिए।

अमलतास की फली मज्जा को धनिये के साथ पीसकर थोड़ा कत्था मिलाकर मुंह में रखिए। या केवल अमलतास के गूदे को मुंहमें रखने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

अमरूद के मुलायम पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले से राहत मिलती है और छाले ठीक हो जाते हैं.

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One Response to Aap mere jaise ho?

  1. satishsaini77 says:

    very good dear

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