Krishna

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जय श्रीकृष्णकर ऐसी इनायत गोविन्द तेरा शुक्र मनाना आ जाये,
हम इन्सां हैं हमें इन्सानों की तरह प्यार निभाना आ जाये।
तेरे कदम हमारी चौखट हैं, हम गिरते रहे तेरे कदमों में,
पर ऐसी शक्ति दे हमें गिरतों को उठाना आ जाये।
मुझे ये न मिला मुझे वो न मिला ये दिल ऐसे ही रोता है,
तेरा प्यार ही मेरी दौलत हो ये दिल को समझाना आ जाये।
ये तन मन धन तेरा मुझे फिर क्या चिंता,
हम तेरे आशिक हैं प्यारे हमें प्यार निभाना आ जाये।
वो मस्त तुझी में रहते हैं जो तेरे आशिक होते हैं,
हम तेरे आशिक बन जायें और सर को झुकाना आ जाये।
बोलो के सुन्दर नक्शे पर हम रंग प्यार का भर पायें,
तेरी हम पर कृपा हो हमें फूल चढाना आ जाये।
krishna 52

“!¥!” Mere To Girdhar Gopal Dusaro Na Koi “!¥!”
“!¥!” Jake Sar Mormukut Mero Pati Hoi “!¥!”

krishna 51
मुझको चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए |

इस जिन्दगी के वास्ते कुछ आबदाना चाहिए || हनुमत चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए ||नित प्रति सेवा करूँ चरणों में रह कर तेरी |
चरणों के स्पर्श का कुछ तो बहाना चाहिए || हनुमत चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए ||पोरवो पर नाम को गिनता रहूँ मैं रात दिन |
बस तुम्हारे नाम का मुझको तराना चाहिए || हनुमत चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए ||

ता जिन्दगी दिल में रहेगी प्रभु सूरत आपकी |
इस काम का मुझे भी थोडा मेहनताना चाहिए|| हनुमत चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए ||

दुनिया की चकचोर में गाफिल न हो जाऊं कही |
मुझको तुम्हारे प्यार का रिश्ता पुराना चाहिए || हनुमत चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए ||

अब ‘श्याम’ जा सकता नहीं चरणों को तेरे छोड़ के |
केवल तुम्हारे नाम का इसको खजाना चाहिए || हनुमत चरणों में तुम्हारे एक ठिकाना चाहिए ||

krishna 50

 हजारों फूल लगते हैं, सिर्फ़ एक माला बनाने के लिए, हजारों दीप लगते हैं, सिर्फ़ एक आरती सजाने के लिए..|| मगर अपना तो एक ही “कृष्णा” काफी हैं, सभी की ज़िन्दगी को “जन्नत” बनाने के लिए..|| जय जय श्री राधे……~ जय श्री श्याम…!!!
krishna 49
 गुलाब मुहब्बत का पैगाम नहीं होता,
चाँद चांदनी का प्यार सरे आम नहीं होता,
प्यार होता है मन की निर्मल भावनाओं से,
वर्ना यूँ ही राधा-कृष्ण का नाम नहीं होता…

krishna 48
 … किसी सम्पन्न इन्सान को धन आदि दान देने से अच्छा है … गाय , कुत्ता और पक्षियों को दाना-पानी, भोजन आदि देकर पुण्य कमायेँ … !

krishna 47
 

Kaaashh..Kanhaaaaaaaaaaaaaa,,,,,,,,,Kisi Khoobsurat Mausam Me,
Meri Aankho Pe Aap Apna Hath Rakh Do,

Or Haste Hue Keh Do, Pehchan Lo To Ham Tmhare
0r Na Pehchano…
To Tum Hmare..

krishna 46
 
..◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆..
Cham cham nache bihari gulam tere banvari
◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆…Shri radhey …◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆
..◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆◇◆..
krishna 45
 Suno Kanhaaaaaaaaaaaaaaa,,,,,,,,,,,,Aur Zamaanat Wafa Ki Kya Hogi…!!!
Tum Meri Sans Girvi Rakh Lo Na…!!!

krishna 44
 शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं
उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं
विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं
कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं………………. . शुभ-संध्या.
जय श्री कृष्णा….

krishna 43
 जय श्री कृष्णा राधे राधे …..

तू रंग है मैं हूँ ख़ुशबू
गुल खिलते हैं अपने मिलन से
तेरा मुखड़ा है सामने मेरे
मुझे मतलब नहीं है चमन से
एक अपनी डगर एक अपना नगर
एक अपनी कहानी हो गई
अब है सबके लबों पर ये ताज़ा ख़बर
राधा श्याम की दीवानी हो गई..!!
krishna 42
 किसी ने एक दिन भगवान से पूछा, “आपने हमें 2 आँखें, 2 कान, 2 हाथ, 2 पैर, 2 होंठ और 2 किडनी दिये हैं।लेकिन सिर्फ एक ही दिल क्यों?

भगवान ने उत्तर दिया, “प्रिये, दिल भी 2 दिये हैं, बस दूसरा ढूढ़ना पड़ता है।

krishna 41
 JAI SHRI RADHE-KRISHNA

मेरा मन तुम्हारा होना चाहता है
….दर्शन दो घनश्याम …अँखियाँ प्यासी ……

krishna 40
 JAI SHRI RADHA KRISHNAकिसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस ”मक्खी” जैसी है जो सारे खूबसूरत बदन को छोड़कर, केवल ‘जख्मों’ पर ही बैठती है !

 krishna 39
 गुलाब मुहब्बत का पैगाम नहीं होता
चाँद चांदनी का प्यार सरे आम नहीं होता
प्यार होता है मन कि निर्मल भावनाओं से
वर्ना यूँ ही राधा-कृष्ण का नाम नहीं होता.

krishna 38
 घनश्याम तुम्हे ढूँढने जाए कहाँ कहाँ !

अपने विरह की आग बुझाए कहाँ कहाँ !!तेरी नजर में जुल्फों में मुस्कान में !
उलझा है दिल तो छुडाये कहाँ कहाँ !!
घनश्याम तुम्हे ढूँढने……………….
चरणों की खाकसारी में खुद ख़ाक बन गये !
अब ख़ाक पे ख़ाक रमाये कहाँ कहाँ !!
घनश्याम तुम्हे ढूँढने……………….

जिनकी नजर देखकर खुद बन गये मरीज !
ऐसे मरीज मर्ज दिखाए कहाँ कहाँ !!
घनश्याम तुम्हे ढूँढने……………….

दिन रात अश्रु बिंदु बरसते तो है मगर !
सब तन में लगी जो आग बुझाए कहाँ कहाँ !!

घनश्याम तुम्हे ढूँढने जाए कहाँ कहाँ !
अपने विरह की आग बुझाए कहाँ कहाँ !!

!!~~**जय जय श्री राधे**~~!!

krishna 37
 ॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥राधे राधे.राधा मेरी चंदा तो चकोर हैं बिहारी ॥राधे राधे……
राधा रानी मिश्री तो स्वाद हैं बिहारी ॥राधे राधे….॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥राधे राधे.॥

krishna 36
 jai shree radhe

तेरा दर्श पाने को जी चाहता है।
खुदी को मिटाने का जी चाहता है॥
पिला दो मुझे मस्ती के प्याले।
मस्ती में आने को जी चाहता है॥
उठे श्याम तेरे मोहोब्बत का दरिया।
मेरा डूब जाने को जी चाहता है॥
यह दुनिया है एक नज़र का धोखा।
इसे ठुकराने को जी चाहता है॥
श्री कृष्ण गोविन्द, हरे मुरारी, हे
नाथ, नारायण, वासुदेव.
krishna 35
 Dosti ho to aesi warna na ho jay shree krishana

krishna 34

चाहे कितनी भी रास रचाले गोपियों संग कृष्णा, फिर भी दुनिया तो यही कहती हैं ना …राधे कृष्णा राधे कृष्णा …
krishna 33
राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,मैया करा दै मेरो ब्याह,
उमर तेरी छोटी रे,नज़र तेरी खोटी रे कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।
राधिका गोरी से,बृज की छोरी से, मैया करा दै मेरो ब्याह,
जो न ब्याह कराये, तेरी गैया नाहि चराऊँ,
आज के बाद मेरी मैया,तेरी दहली पर नाय आऊँ,
राधिका गोरी से,बृज की छोरी से, मैया करा दै मेरो ब्याह,
चंदन की चौकी पै मैया तोहे बैठाऊं
अपनी राधा से में चरण तेरे दबवाऊँ
और, भोजन में बनवाऊगो छप्पन प्रकार के । ।
राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,मैया करा दै मेरो ब्याह,
उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।
छोटी सी दुल्हनिया जब अंगना में डोलेगी
तेरे सामने मैया वो घूंघट ना खोलेगी
दाऊ से जा कहो, जा कहो बैठेंगे द्वार
राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,मैया करा दै मेरो ब्याह,
उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।
सुन बातें कान्हा की,मैया बैठी मुसकाये
लेके बलाइयां मैया,हिवडे से अपने मैया
नज़र कहीं लग जाए ना, लग जाए ना
राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,मैया करा दै मेरो ब्याह,
उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।
राधिका गोरी से, बृज की छोरी से मैया करा दै मेरो ब्याह,
krishna 32
 मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने ……..
छलिया से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने ……..
हर बात निराली है उसकी हर बात मैं है एक टेढ़ापन ……….
टेढ़े पर दिल क्यों आया है ये मैं जानू या वो जाने ………

krishna 31
 आज हमारी नानी ने हमें एक भजन सिखाया
”मेरी श्याम से लग गई प्रीत दुनिया क्या जाने”

krishna 30
 मटकी को मार के कांकरिया ….

तुने फोड़दी मेरी गागरियामैं घर जाऊंगी ,मैया से कहूँगी
तुने मटकी मेरी फोड़ी मै चुप ना रहूंगी ….घर से चली थी मै दही बेचन को
रस्ते में मिल गयो कृष्ण कन्हइयो
अब ना रुकुंगी कुछ ना सुनुगी …….मार के कांकरिया मेरी मटकी तुने फोड़ी
आई ना लाज जुल्मी तुझको थोड़ी
अब ना रुकुंगी शिकायत करुँगी…… तुने मटकी …

बनो ना कठोर थोड़ी दया से भी काम लो
मटकी तेरी फूटी है ,इसका मुझसे दाम लो
मेरे घर जायेगी बात बढ़ जायेगी,मैंने मटकी तेरी फोड़ी तू कुछ ना कहेगी
मैंने फोड़दी तेरी गागरिया -मैंने फोड़दी तेरी गागरिया

krishna 29
 मेरे जीवन की बगिया, सूख चली, घनश्याम तू, रस बरसाता जा

आशाओं की भरी है डाली,बस एक ही कली खिलाता जा
मैं सींच-सींच के हार गयी, नैनों की खारे पानी से
मैं विनती कर-कर हार गयी, इस उलटी-सीधी वाणी से
मैं पूछ-पूछ के हार गयी, तेरी राह चलते हर प्राणी से
मैं खोज-खोज के हार गयी, कर्मों की अख्त कहानी से
हैं कहा छुपाया प्यार सखे, इसका कुछ पता बताता जा
है भला भरोसा,क्या जीवन की बहती धरा का, प्यारे”
धर के अधरों पर बाँसुरिया, आ नव-नव रंग जमाते जा
मेरे जीवन की बगिया, सूख चली, घनश्याम तू, रस बरसाता जा.
krishna 28
 आधी राधा आधे श्याम..पूर्ण हुये तब राधेश्याम….प्रीत ये जिसके दिल मे रहती…वो जपते है राधेश्याम….जय-जय श्री राधेश्याम……….

 krishna 27
 मेरे प्रिय आत्मीय परिजनों .. सभी दोस्तों ..नमस्कार… शुभ संध्या ….. ..जय श्री राधे कृष्णा …..

घूंघट में अपने मुह को छिपाते हुए कृष्ण किशोरी जी के सामने पहुंचे और उनका हाथ पकड़ कर बोले कि कहो सुकुमारी तुम्हारे हाथ पे किसका नाम लिखूं। तो किशोरी जी ने उत्तर दिया कि केवल हाथ पर नहीं मुझे तो पूरे श्री अंग पर लील्या गुदवाना है और क्या लिखवाना है, किशोरी जी बता रही हैं:
माथे पे मदन मोहन, पलकों पे पीताम्बर धारी
नासिका पे नटवर, कपोलों पे कृष्ण मुरारी
अधरों पे अच्युत, गर्दन पे गोवर्धन धारी
कानो में केशव और भृकुटी पे भुजा चार धारी
छाती पे चालिया, और कमर पे कन्हैया
जंघाओं पे जनार्दन, उदर पे ऊखल बंधैया
गुदाओं पर ग्वाल, नाभि पे नाग नथैया
बाहों पे लिख बनवारी, हथेली पे हलधर के भैया
नखों पे लिख नारायण, पैरों पे जग पालनहारी
चरणों में चोर माखन का, मन में मोर मुकुट धारी
नैनो में तू गोद दे, नंदनंदन की सूरत प्यारी
और रोम रोम पे मेरे लिखदे, रसिया रणछोर वो रास बिहारी
दंत नाम दामोदर लिख दे, बाहों बीच लिखो बनवारी
रोम-रोम में लिख दे रसिया ए लिलहार की गोदनहारी।
जय जय श्री राधे कृष्णा …..
krishna 26
Jai Shri Krishna ,I knocked at havens door,God asked: what do you want? I request ! LOve,Prosperity & Long life for the reader of this status,God smiled and said “GRANTED”……..

krishna 25
 दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना,
रामजी चले ना हनुमान के बिना
जब से रामायण पढ ली है इक बात मैने समझ ली हैं,
रावण मरे ना श्रीराम के बिना लंका जले ना हनुमान के बिना.

दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना,
रामजी चले ना हनुमान के बिना.
लक्ष्मण का बचना मुश्किल था कोन बुटी लाने के काबिल था
लक्ष्मण बचे ना श्रीराम के बिना बुटी मिले ना हनुमान के बिना.
दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना,
रामजी चले ना हनुमान के बिना.
सीता हरण की कहानी सुनो बनवारी मेरी जुबानी सुनो
वापस मिले ना श्री राम के बिना पता चले ना हनुमान के बिना.दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना,
रामजी चले ना हनुमान के बिना.
सिहांसन पे बैठे हैं श्रीराम जी , चरणों में बैठे है हनुमान जी
मुक्ती मिले ना श्रीराम के बिना, भक्ति मिले ना हनुमान के बिना.दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना,
रामजी चले ना हनुमान के बिना.
दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना, रामजी चले ना हनुमान के बिना.
krishna 24
 पल ने कहा इक पल से, इक पल के लिऐ तुम मेरे हो जाओ,
इक पल का साथ हो ऐसा ,हर पल तुम ही तुम याद् आओं .

 krishna 23
 
चांदनी आज भीगी भीगी सी है हो न हो फिर भीगी है तेरी ऑंखें किसी बात पर..

 krishna 22

नींद कभी रहती थी आँखों में
अब रहते हैं साँवरिया
चैन कभी रहता था इस दिल में
अब रहते हैं साँवरिया…………………………………..!!

लोग मुझसे कहें, देखो उधर……..निकला है चाँद
कौन देखे उधर, जाने किधर……..निकला है चाँद
चाँद कभी रहता था नज़रों में
अब रहते हैं साँवरिया…………………………………..!!
झूठ बोली पवन, कहने लगी……..आई बहार
हम बाग़ में गए, देखा वहाँ……..प्यार ही प्यार
फूल रहते होंगे चमन में कभी,
अब रहते हैं साँवरिया…………………………………..!!बात पहले थी और, तूफ़ान थे…….. डरते थे हम
बात अब और है, अब है हमें……..काहे का गम
साथ कभी माझी थे सँग लेकिन,
अब रहते हैं साँवरिया…………………………………..!!नींद कभी रहती थी आँखों में
अब रहते हैं साँवरिया
चैन कभी रहता था इस दिल में
अब रहते हैं साँवरिया…………………………………..!!
krishna 21
 इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

गोविन्द नाम लेके जब प्राण तन से निकलेश्री गंगा जी का तट हो, जमुना जी का वंशीवट हो
मेरा संवारा निकट हो जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी …………………….
पीताम्बरी कसी हो, छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हंसी हो जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी …………………….जब कंठ प्राण आये कोई रोग न सताए
यम दरश न दिखिए जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी …………………….उस वक़्त जल्दी आना न श्याम भूल जाना
राधे को साथ लाना जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी …………………….

इक भक्त की है अर्जी खुदगर्ज की है गर्जी
आगे तुम्हारी मर्जी जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी …………………….

krishna 20
 जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो

चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो
तन श्याम नाम की चादर हो,जब गहरी नींद में सोयी रहूँ
कानो में मेरे गुंजित हो, कान्हा बस नाम तुम्हारा हो
रस्ते में तुम्हारा मंदिर हो,
जब मंजिल को प्रस्थान करूँ
चौखट पे तेरी मनमोहन, अंतिम प्रणाम हमारा हो
उस वक्त कन्हैया आ जाना, जब चिता पे जाके शयन करूँ
मेरे मुख में तुलसी दल देना, इतना बस काम तुम्हारा हो
गर सेवा की मैंने तेरी, तो उसका ये उपहार मिले
इस”तुच्छ”भगत का साँवरिये, नहीं आना कभी भी दुबारा हो
जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो.
जीवन का श्रेष्ट लक्ष्य ज्ञान पाना नहीं बल्कि उसे जीवन में धारण कर स्व का विकास करना है ,,,:))ॐ शांति.
krishna 19
 जय श्री राम
चित्रों का भी मित्र हूँ
और मित्रॉं का भी मित्र हूँ,,
खुद को कभी पहचाना नहीं
प्राणी बडा विचित्र हूँ,, !!!

krishna 18
 ♫♫.•*¨`*•..¸☼¸.•*¨`*•.♫♫♫
╔════════ ೋღღೋ ════════╗
* JAI SHRI KRISHNA♥☼♥ ♥✿♥*
╚════════ ೋღ❤ღೋ ════════╝
❤♫❤♫❤.•*¨`*•..¸♥☼♥¸.•*¨`*•.♫❤♫❤♫❤

krishna 17
 Bolo baanke bihari laal ki jai…
क्या लाया था साथ में,जो जायेगा “साथ” !
जावेगा जिस रोज तू, होंगे खाली ” हाथ” !!
jai radhey krishna!!!!!!

krishna 16
 Hr Sham Kisi K Liye Suhani Nhi Hoti,
Hr Chahat K Piche Koi Kahani Nhi Hoti,
Kuch To Hota H MOHHBBT Me, Wrna
Gori Radha
Savle shyam
Ki Diwani Nhi Hoti.

krishna 15
 Krishna jiska Naam
gokul jiska Dhaam
Aise shree Bhagwan ko hum sab kare pranam
jai shree krishna

krishna 14
 एक बार श्री राधिका रानी ने बड़े प्यार से श्री कृष्ण से पूछा – किप्रभु! ,
मै आपसे कितना स्नेह, कितना प्रेम करती हूँ इस से तो आप भली भांति परिचित है.
पर आज मै आपसे पूछती हूँ कि आप मुझे कितना प्रेम करते हैं ? “राधे रानी की यह बात सुनकर प्रभु मुस्काए और बड़े प्यार से बोले” प्रिये मै आपसे नमक जितना प्रेम करता हूँ.”यह बात सुनकर राधा रानी को बड़ा ही आश्चर्य हुआ कि मै प्रभु को इतना प्रेम करती हूँ कि अपना समस्त जीवन उन पर न्योंछावरकर दिया है.
और प्रभु मुझे केवल नमक जितना ही चाहते है ?भरे गले से उन्होंने यह बात प्रभु से कही.

प्रभु ने सोचा राधा रानी के मन में चल रहे प्रश्न का निराकरण करना ही होगा.

उन्होंने राधा रानी से कहा कि –

प्रिये! अपनी राजधानी में सभी को आज निमंत्रण दो और तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर उन्हें खिलाओ.
पर एक बात ध्यान रहे कि आप किसी भी व्यंजन में नमक मत डालना.

भोली भाली राधा रानी ने ऐसा ही किया.

निर्धारित समय पर सभी एकत्रित हुए. राधा रानी ने बड़े ही आदर सत्कार से सभी का स्वागत किया.
और भोजन करने को कहा.

सारी प्रजा राधा रानी के आँगन में भोजन करने हेतु बैठ गयी.

भोजन परोसा गया.

प्रभु कि आज्ञा पाकर सभी ने भोजन करना आरम्भ किया.

कोई एक निवाला खाता.
कोई दो निवाला खाता.
सभी एक दुसरे को निहारते.

प्रभु कहते..

खाइए- खाइए, प्रेम से खाइए,

प्रभु की बात सुनकर एक बुज़ुर्ग ने कहा -कि

प्रभु! ५६ प्रकार के भोजन आपने बनवाये है.
जिन्हें देखने मात्र से मुंह में पानी आ रहा है. परन्तु इनमे से किसी भी व्यंजन में नमक नहीं है. इसलिए यह सभी फीके लग रहे है. कृपा करके राधा रानी से कहे की इनमे नमक डाले. ताकि यह भोजन खाने योग्य हो.

प्रभु बोले-

प्रिये! अब सभी व्यंजन में नमक डाल दो.

प्रभु आज्ञा पाकर राधा रानी ने सभी व्यंजनों मेंनमक डाल दिया. और प्रजा को दोबारा भोजन करने को कहा.

सारी प्रजा ने सभी व्यंजन को भरपूर आनंद के साथ ग्रहण किया.

यह देख प्रभु मुस्कुरा कर राधा रानी की ओर देखा.

राधा रानी को अपने भीतर चल रहे प्रश्न का उत्तर मिल गया था.

और वो समझ गयीं की प्रभु उन्हें कितना प्रेम करते है.

“जय जय श्री राधे”.

krishna 13
 जय हो युगल सरकार की,

जय श्री माधव, जय श्री राधे, जय जय श्री राधे..!!

krishna 12

tuk tuk niharu tohe shyam mere ghanshyam
Jai jai shri krishna …

krishna 11

करते हो तुम दिन रात क्यों बिन बात की चिंता
तेरे कान्हा को रहती है तेरी हर बात की चिंता…..

! प्यारा कान्हा !

जय श्री श्याम…!!!!

जय श्री श्यामा श्याम…राधे राधे जी सभी को…………

krishna 9
!! राधे ने पायल बजाई, कि दोड़े चले आये कन्हाई…!!

krishna 8

मौर मुंकुट बंसी वाले की जय….

krishna 7

मेरा कान्हा, मेरा केशू…
मैया का दुलारा, इस जग का सहारा !
भाए मुझे तेरा रूप सलोना,
नटखट गोपाला.. तू ही खेवनहारा….
HARE KRISHNA…

krishna 6

सताओ ना हमे उधो हमे दिल की बिमारी है।
हमारा वैद दुनिया में तो बस बांके बिहारी हैं॥

संदेशा श्याम का लाये कटारी क्यूँ नहीं लाये।
जहर का प्याला ले आते ख़तम होती बिमारी यह॥

ना अब हम आँख खोलेंगे, ना मुख से कुछ भी बोलेंगे।
मिलादों श्याम से ए उधो, येही विनती हमारी है॥

मोहन कर गए वादा, मैं परसों लौट आउंगा।
परसों से हुए बरसो, नहीं सुध ली हमारी हैं॥

ना हमने भांग है खायी, ना विष का पान ही किया।
हमारे तन में और मन में, उन्ही की याद समायी है॥

krishna 5

Krishn jiska naam hai gokul jinka dhaam hai ..
aise shri bhagwan ko barmbaar pranaam hai _/\_

krishna 4

sabki naiya par lagiya krishn kanhiya sawree
brij gopin k chit churaiya manmohan ghanshyam re…

jai ho madhav ..

3

tune kaun se punya kiye radhe,

jo shyam tere ghar aate hain…………..

2

नमन वंदन आपका ………..
सोचो समझो फिर करो ,
जीवन में हर काम ।
निश्चित ही तुम पाओगे ,
मनचाहा परिणाम.

1

ये शरीर हमारा न तो था न है और न ही रहेगा!
अगर हमारा कुछ है तो वो है हमारी आत्मा तो क्यों न हम अपने शरीर को संवारने की बजाय अपनी आत्मा को संवारें
!!!जय श्री राध॓ राध॓……………………………जय श्री शयाम!!!

krishna

लाखों गंवाया पर नाम खूब कमाया
बोलो फायदे का सौदा किया या घाटे का ?

krishna

राधा जी बोली श्री कृष्णा से …….
एक शर्त पे खेलूंगी प्यार की होली…..
जीतू तो तुझे पाऊ… और.. हारु तो तेरी हो जाऊ……

जय श्री कृष्णा।….

krishna holi

 ~ ~ जय श्री कृष्ण ~ ~ ~ ~ जय श्री कृष्ण ~ ~

श्री कृष्ण :- मनुष्य के लिए लक्ष्य विन्दु!
श्री राधा :- मनुष्य के लिए समस्त इन्द्रियों को वश में करने का आधार!
मोर पंख :- मनुष्य के लिए श्यान लगाने का साधन!
गौ :- मनुष्य के लिए सिद्धांतों एवं नियमों का सूत्र!
वृन्दावन :- मनुष्य के लिए आत्मचिंतन करने का स्थान!
नंदगाँव :- मनुष्य के लिए क्रीडा स्थली!
बरसाना :- मनुष्य के लिए प्रेम स्थली!
द्वारिका :- मनुष्य के लिए करम स्थली!
गोकुल :- मनुष्य के लिए ज्ञान स्थली!
गोवर्धन पर्वत :- मनुष्य के लिए अपने आप को पहचानने का मार्ग!
कान्हा की मुरली धुन :- मनुष्य की आत्मा की आवाज़!
महारास :- मनुष्य के लिए साक्षात गोकुल धाम में सुख का अनुभव

krishna

2 Responses to Krishna

  1. Lakshman says:

    Jay Radhe Krishna

  2. Sanjit Kumar Bandyopadhyay. says:

    Ankohn me thandak la diya………dil me aye chayan……..Krishna ko dekh liya……var aye mere nayan.

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